Maruti Academy Satrunda

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जन गण मन

जन गण मन अधिनायक जय हे

भारत भाग्य विधाता

पंजाब सिन्ध गुजरात मराठा

द्राविड़ उत्कल बंग

विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा

उच्छल जलधि तरंग

तव शुभ नामे जागे

तव शुभ आशिष मागे

गाहे तव जय गाथा

जन गण मंगल दायक जय हे

भारत भाग्य विधाता

जय हे जय हे जय हे

जय जय जय जय हे

 

 

We Shall Overcome

We shall overcome,
We shall overcome,
We shall overcome, some day.
Oh, deep in my heart,
I do believe
We shall overcome, some day.
We’ll walk hand in hand,
We’ll walk hand in hand,
We’ll walk hand in hand, some day.
Oh, deep in my heart,
I do believe
We shall overcome, some day.
We shall live in peace,
We shall live in peace,
We shall live in peace, some day.
Oh, deep in my heart,
I do believe
We shall overcome, some day.
We are not afraid,
We are not afraid,
We are not afraid, TODAY
Oh, deep in my heart,
I do believe
We shall overcome, some day.
The whole wide world around
The whole wide world around
The whole wide world around some day
Oh, deep in my heart,
I do believe
We shall overcome, some day.

LUNCH PRAYER

Thank you for the world so sweet,
Thank you for the food we eat.
Thank you for the birds that sing,
Thank you God for everything.

 

THE PLEDGE

India is my country and all Indians are my brothers and sisters.
I love my country and I am proud of its rich and varied heritage.
I shall always strive to be worthy of it.
I shall give my parents, teachers and all elders respect and treat everyone with courtesy.
To my country and my people, I pledge my devotion.
In their well-being and prosperity alone, lies my happiness.

विद्यालय की प्रार्थना

गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।

गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥

असतो मा सदगमय ॥ तमसो मा ज्योतिर्गमय ॥ मृत्योर्मामृतम् गमय ॥

दया कर, दान भक्ति का,

दया कर, दान भक्ति का, हमें परमात्मा देना।
दया करना, हमारी आत्मा को शुद्धता देना॥
हमारे ध्यान में आओ, प्रभु आँखों में बस जाओ।
अंधेरे दिल में आकर के परम ज्योति जगा देना॥दया कर, दान भक्ति का, हमें परमात्मा देना।
बहा दो प्रेम की गंगा  दिलो में प्रेम का सागर।
हमें आपस में मिलजुल कर प्रभु रहना सिखा देना॥दया कर, दान भक्ति का, हमें परमात्मा देनाहमारा धर्मं हो सेवा हमारा कर्म हो सेवा
सदा ईमान हो सेवा हो सेवकचर बना देना।दया कर दान भक्ति का हमें परमात्मा देना।वतन के वास्ते जीना वतन के वास्ते मरना।
वतन पर जा फ़िदा करना प्रभु हमको सिखा देना॥दया कर, दान भक्ति का, हमें परमात्मा देनादया करना, हमारी आत्मा को शुद्धता देना
दया कर, दान भक्ति का, हमें परमात्मा देनादया कर, दान भक्ति का, हमें परमात्मा देना

झंडा ऊँचा रहे हमारा

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।
सदा शक्ति बरसाने वाला,
प्रेम सुधा सरसाने वाला
वीरों को हरषाने वाला
मातृभूमि का तन-मन सारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

स्वतंत्रता के भीषण रण में,
लखकर जोश बढ़े क्षण-क्षण में,
काँपे शत्रु देखकर मन में,
मिट जावे भय संकट सारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

इस झंडे के नीचे निर्भय,
हो स्वराज जनता का निश्चय,
बोलो भारत माता की जय,
स्वतंत्रता ही ध्येय हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

आओ प्यारे वीरों आओ,
देश-जाति पर बलि-बलि जाओ,
एक साथ सब मिलकर गाओ,
प्यारा भारत देश हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

इसकी शान न जाने पावे,
चाहे जान भले ही जावे,
विश्व-विजय करके दिखलावे,
तब होवे प्रण-पूर्ण हमारा,
झंडा ऊँचा रहे हमारा।

 

वंदे मातरम्‌ 

 

सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्‌

स्यश्यामलां मातरम्‌ ।

 

शुभ्रज्योत्नातर पुलकितयामिनीं

फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं

सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं

सुखदां वरदां मातरम्‌ ॥

वंदे मातरम्‌ ।

 

कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले,

कोटि-कोटि-भुजैधृत-खरकरवाले,

अबला केन मा एत बले ।

बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं

रिपुदलवारिणीं मातरम्‌ ॥

वंदे मातरम्‌ ।

 

तुमि विद्या, तुमि धर्म

तुमि हृदि, तुमि मर्म

त्वं हि प्राणाः शरीरे

बाहुते तुमि मा शक्ति

हृदये तुमि मा भक्ति

तोमारई प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्‌ ॥

वंदे मातरम्‌ ।

 

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी

कमला कमलदलविहारिणी

वाणी विद्यादायिनी, नामामि त्वाम्‌

कमलां अमलां अतुलां सुजलां सुफलां मातरम्‌ ॥

वंदे मातरम्‌ ।

 

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां

धरणीं भरणीं मातरम्‌ ॥

वंदे मातरम्‌ ।

श्री हनुमत् स्तवन 

प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ज्ञानघन |
जासु हृदय आगार बसहिं राम सरचाप धर ||१||

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम् |
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् ||२||

सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम् |
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि ||३||

गोष्पदीकृतवारीशं मशकीकृतराक्षसम् |
रामायणमहामालारत्नं वन्देऽनिलात्मजम् ||४||

अञ्जनानन्दनं वीरं जानकीशोकनाशनम् |
कपीशमक्षहन्तारं वन्दे लङ्काभयङ्करम् ||५||

महाव्याकरणाम्भोधिमन्थमानसमन्दरम् |
कवयन्तं रामकीर्त्या हनुमन्तमुपास्महे ||६||

उल्लङ्घ्य सिन्धो: सलिलं सलीलं य: शोकवह्निं जनकात्मजाया: |
आदाय तेनैव ददाह लङ्कां नमामि तं प्राञ्जलिराञ्जनेयम् ||७||

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् |
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ||८||

आञ्जनेयमतिपाटलाननं काञ्चनाद्रिकमनीयविग्रहम् |
पारिजाततरुमूलवासिनं भावयामि पवमाननन्दनम् ||९||

यत्र-यत्र रघुनाथकीर्तनं तत्र-तत्र कृतमस्तकाञ्जलिम् |
बाष्पवारिपरिपूर्णलोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तकम् ||१०

गायत्री मंत्र 

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः

धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्

भोजन मंत्र

ॐ सह नाववतु।
सह नौ भुनक्तु।
सह वीर्यं करवावहै।
तेजस्विनावधीतमस्तु।
मा विद्‌विषावहै॥
ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥

 

हे हंसवाहिनी

हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥
जग सिरमौर बनाएं भारत,
वह बल विक्रम दे। वह बल विक्रम दे॥
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥
साहस शील हृदय में भर दे,
जीवन त्याग-तपोमर कर दे,
संयम सत्य स्नेह का वर दे,
स्वाभिमान भर दे। स्वाभिमान भर दे॥1॥
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥
लव, कुश, ध्रुव, प्रहलाद बनें हम
मानवता का त्रास हरें हम,
सीता, सावित्री, दुर्गा मां,
फिर घर-घर भर दे। फिर घर-घर भर दे॥2॥
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥

सरस्वती वंदना

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥
शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥
हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।
वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्‌॥2॥

सारे जहाँ से अच्छा

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा
हम बुलबुलें हैं इसकी ये गुलिस्तां हमारा

ग़ुर्बत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में
समझो वहीं हमें भी दिल है जहाँ हमारा

परबत वह सबसे ऊँचा, हम्साया आसमाँ का
वह संतरी हमारा, वह पासबाँ हमारा

गोदी में खेलती हैं इसकी हज़ारों नदियाँ
गुल्शन है जिनके दम से रश्क-ए-जनाँ हमारा

ऐ आब-ए-रूद-ए-गंगा! वह दिन हैं याद तुझको
उतरा तेरे किनारे जब कारवाँ हमारा

मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोस्तां हमारा

यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रूमा सब मिट गए जहाँ से
अब तक मगर है बाक़ी नाम-ओ-निशाँ हमारा

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा

इक़्बाल! कोई महरम अपना नहीं जहाँ में
मालूम क्या किसी को दर्द-ए-निहाँ हमारा

दया कर दान

दया कर, दान भक्ति का, हमें परमात्मा देना।
दया करना, हमारी आत्मा को शुद्धता देना॥

हमारे ध्यान में आओ, प्रभु आँखों में बस जाओ।
अंधेरे दिल में आकर के परम ज्योति जगा देना॥

दया कर, दान भक्ति का, हमें परमात्मा देना।

बहा दो प्रेम की गंगा दिलो में प्रेम का सागर।
हमें आपस में मिलजुल कर प्रभु रहना सिखा देना॥

दया कर, दान भक्ति का, हमें परमात्मा देना

हमारा धर्मं हो सेवा हमारा कर्म हो सेवा
सदा ईमान हो सेवा हो सेवकचर बना देना।

दया कर दान भक्ति का हमें परमात्मा देना।

वतन के वास्ते जीना वतन के वास्ते मरना।
वतन पर जा फ़िदा करना प्रभु हमको सिखा देना॥

दया कर, दान भक्ति का,हमें परमात्मा देना
दया करना, हमारी आत्मा को शुद्धता देना
दया कर, दान भक्ति का, हमें परमात्मा देना

दया कर, दान भक्ति का, हमें परमात्मा देना

हम को मन की शक्ति देना

हम को मन की शक्ति देना
मन विजय करें
दूसरों की जय से पहले
खुद को जय करें) x २

हम को मन की शक्ति देना

भेदभाव, भेदभाव अपने दिल से
साफ़ कर सके
दोस्तों से भूल हो तो
माफ़ कर सकें
झूठ से बचे रहें, सच का दम भरे
दूसरों की जय से पहले
खुद को जय करें

हम को मन की शक्ति देना
मन विजय करें
दूसरों की जय से पहले
खुद को जय करें
हम को मन की शक्ति देना

मुश्किलें पड़ें तो हम पे इतना कर्म कर
साथ दे तो धर्म का, चलें तो धर्म पर
खुद पे हौसला रहे, बदी से ना डरें
दूसरों की जय से पहले
खुद को जय करें

हम को मन की शक्ति देना
मन विजय करें
दूसरों की जय से पहले
खुद को जय करें
हम को मन की शक्ति देना

तू ही राम है

तू ही राम है, तू रहीम है,

तू करीम, कृष्ण, खुदा हुआ,

तू ही वाहे गुरु, तू ईशू मसीह,

हर नाम में, तू समा रहा ।

तू ही राम है, तू रहीम है,…….

तेरी जात पाक कुरान में,

तेरा दर्श वेद पुराण में ,

गुरु ग्रन्थ जी के बखान में,

तू प्रकाश अपना दिखा रहा ।

तू ही राम है, तू रहीम है,…….

अरदास है, कहीं कीर्तन,

कहीं राम धुन, कहीं आव्हन,

विधि भेद का है ये सब रचन,

तेरा भक्त तुझको बुला रहा ।

तू ही राम है, तू रहीम है,

तू करीम, कृष्ण, खुदा हुआ,

तू ही वाहे गुरु, तू ईशू मसीह,

हर नाम में, तू समा रहा ।

तू ही राम है, तू रहीम है,…….

तू ही ध्यम में ,तू ही ज्ञान में

तू ही प्राणियों के प्राण में

कहीं आंसू में बहा तू ही

कहीं फूल बनके खिला हुआ। ।

तू ही राम है, तू रहीम है,

तू करीम, कृष्ण, खुदा हुआ,

तू ही वाहे गुरु, तू ईशू मसीह,

हर नाम में, तू समा रहा ।

तू ही राम है, तू रहीम है,…….

विधि वेष जात के भेद से

हमें मुक्त कर दो परम पिता ,

तुझे देख पाये सभी में हम

तुझे ध्या सके हम सभी जगह। ।

तू ही राम है तू रहीम है,

तू करीम, कृष्ण, खुदा हुआ,

तू ही वाहे गुरु, तू ईशू मसीह,

हर नाम में, तू समा रहा ।

तू ही राम है तू रहीम है,…….

तेरे गुण नहीं हम गा सके

तुझे कैसे मन में ध्या सके,

है दुआ यही तुझे पा सके

तेरे दर पे सर ये झुका हुआ। ।

तू ही राम है तू रहीम है

तू करीम कृष्ण खुदा हुआ,

तू ही वाहे गुरु, तू ईशू मसीह,

हर नाम में, तू समा रहा

तू ही राम है तू रहीम है …….

इतनी शक्ति हमें दे न दाता

इतनी शक्ति हमें दे न दाता
मनका विश्वास कमज़ोर हो ना
हम चलें नेक रास्ते पे हमसे
भूलकर भी कोई भूल हो ना…

हर तरफ़ ज़ुल्म है बेबसी है
सहमा-सहमा-सा हर आदमी है
पाप का बोझ बढ़ता ही जाये
जाने कैसे ये धरती थमी है
बोझ ममता का तू ये उठा ले
तेरी रचना क ये अन्त हो ना…
हम चले…

दूर अज्ञान के हो अन्धेरे
तू हमें ज्ञान की रौशनी दे
हर बुराई से बचके रहें हम
जितनी भी दे, भली ज़िन्दगी दे
बैर हो ना किसीका किसीसे
भावना मन में बदले की हो ना…
हम चले…

हम न सोचें हमें क्या मिला है
हम ये सोचें किया क्या है अर्पण
फूल खुशियों के बाटें सभी को
सबका जीवन ही बन जाये मधुबन
अपनी करुणा को जब तू बहा दे
करदे पावन हर इक मन का कोना…
हम चले…

हम अन्धेरे में हैं रौशनी दे,
खो ना दे खुद को ही दुश्मनी से,
हम सज़ा पाये अपने किये की,
मौत भी हो तो सह ले खुशी से,
कल जो गुज़रा है फिरसे ना गुज़रे,
आनेवाला वो कल ऐसा हो ना…
हम चले नेक रास्ते पे हमसे,
भुलकर भी कोई भूल हो ना…

इतनी शक्ति हमें दे ना दाता,
मनका विश्वास कमज़ोर हो ना…

       

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